What is news writing art? | समाचार लेखन कला क्या है?

कहा जाता है सारा विश्व समाचारों का जंगल है। अक्सर किसी सम्बन्धी के मिलने पर पूछा जाता है अरे! क्या समाचार है? अभिप्राय साफ है कि हम उस समीपस्थ सम्बन्धी से अनुकूल-प्रतिकूल जीवन स्थितियों, घटनाओं के विषय में पूछ रहे हैं। व्यक्ति का यह स्वभाव है। कि अपनी बात कहता है और दूसरे की बात सुनता है। कुछ जानकारी देता है और जानकारी लेता है यह जानकारी अर्थात् सूचना ही समाचार का आधार तत्त्व है।

विश्व की पत्रकारिता इस सूचना देने वाले दायित्व का निवर्हण कर रही है। समाचार-पत्रों में ही नहीं रेडियो और टी.वी. पर भी समाचारों का अपना महत्त्व है। सच तो यह है कि हम समाचारविहीन पत्र की परिकल्पना नहीं कर सकते। विद्युतीय मीडिया रेडियो, टी.वी. आज सशक्त समाचार प्रदाता बने हुए हैं ।

‘समाचार’ अंग्रेजी में न्यूज (News) कहलाता है। इसे प्राय: New अर्थात् नयेपन के अर्थों में लिया जाता है। News इसी का बहुवचन है। चतुर्दिक बोध अर्थात् North, East, West and South उत्तर, पूर्व, पश्चिम, दक्षिण का बोध कराने वाला ही समाचार है। हेडन ने समाचार को सब दिशाओं की घटना माना है। अंग्रेजी में न्यू, लैटिन में नोवा, संस्कृत में नव सभी नवीनता के अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। ब्रिटेन के पत्र मानचेस्टर गार्जियन ने समाचार की परिभाषा इस प्रकार दी है

‘समाचार किसी अनोखी या असाधारण घटना की अविलम्ब सूचना को कहते हैं जिसके बारे में लोग प्रायः कुछ न जानते हों, लेकिन जिसे जानने में तुरन्त जानने की अधिक से अधिक लोगों की रुचि हो।

अक्सर कहा जाता है किसी कुत्ते ने किसी व्यक्ति को काट लिया तो यह कोई समाचार नहीं, क्योंकि अक्सर ऐसा होता ही है, पर यदि व्यक्ति किसी कुत्ते को काट ले तो यह एक समाचार है, क्योंकि इसनें नवीनता है, अनोखापन है और सब इसे जानना चाहेंगे।

समाचार की कुछ परिभाषाएं इस प्रकार हैं 

“उन महत्त्वपूर्ण घटनाओं की जिनमें जनता की दिलचस्पी हो, पहली रिपोर्ट को समाचार कह सकते हैं।” – इरी सी. हापवुड 

“जिसे अच्छा सम्पादक प्रकाशित करना चाहे वही समाचार है।” 

“समाचार घटना का विवरण है। घटना स्वयं में समाचार नहीं।” 

“घटनाओं, तथ्यों और विचारों की सामयिक रिपोर्ट समाचार है, जिसमें पर्याप्त लोगों की रुचि हो।” – विलियम एल. रिवर्स 

कोई घटना जिसमें मनुष्य की दिलचस्पी हो, समाचार है।

 पाठक जिसे जानना चाहते हैं, वह समाचार है। 

समाचार सामान्यतः वह उत्तेजक सृजना है जिससे कोई व्यक्ति संतोष अथवा उत्तेजना प्राप्त करता है ।” – प्रो. चिल्टन बुश

“किसी समय होने वाली उन महत्त्वपूर्ण घटनाओं के सही और पक्षपातरहित विवरण की, जिसमें उस पत्र के पाठकों की अभिरुचि हो, हम समाचार कह सकते हैं। ” – विलियम एस. माल्सबाई 

“वह सत्य घटना या विचार जिसमें बहुसंख्यक पाठकों की अभिरुचि हो ।” – एम. लाइल स्पेंसर 

समाचार वह है जिसे प्रस्तुत करने में किसी बुद्धिमान (समाचार-पत्र के) व्यक्ति को सबसे अधिक संतोष हो, और जो ऐसा है जिस प्रस्तुत करते समय प्रस्तुतकर्त्ता को कोई अधिक लाभ तो न होता हो, परन्तु जिसके सम्पादन से ही उसकी व्यावसायिक कुशलता का पूरा-पूरा पता चलता हो, सम्पादक की इस क्षमता की सबसे बड़ी कसौटी अस्पष्टताओं और दुरूहताओं की ओट में छिपे महत्त्वपूर्ण तथ्यों को इस ढंग से प्रस्तुत करना है कि उन तथ्यों को इस दुनिया के वे लोग भी समझ जाएं जिनमें अज्ञानता लापरवाही और मूर्खता ही भरी है तथा विचारों के संघर्ष के प्रति रुचि का अभाव है ।

 “श्रेष्ठ समाचार की परिभाषा यद्यपि यही है, तथापि साधारण व्यवहार में समाचार वे हैं जो अखबार में छपते हैं और अखबार वे हैं

जिन्हें समाचार-पत्र में काम करने वाले तैयार करते हैं। यह कथा यद्यपि वेदनामूलक हैं तथापि कटु व्यंग्य होते हुए भी सत्य हैं।” एफ – जे. डब्ल्यू. जानसन 

हार्पर लीच और जान सी. कैरोल अनुसार- “समाचार’ अति गतिशील साहित्य है। समाचार-पत्र समय के करघे पर इतिहास के बहुरंगे बेल बूटेदार कपड़े को बुनने वाले तकुए हैं।”

 श्री नंदकिशोर त्रिखा ने समाचार की परिभाषा इस प्रकार दी है- “समाचार-पत्र का मौलिक कच्चा माल न कागज है, न स्याही। वह है समाचार। फिर चाहे प्रकाशित सामग्री ठोस संवाद के रूप में हो या लेख के रूप में, सबके मूल में वही तत्त्व रहता है जिसे हम समचार कहते हैं।” 

“अनेक व्यक्तियों की अभिरुचि जिस सामयिक बात में होती है, वह समाचार है सर्वश्रेष्ठ समाचार वह है, जिसमें बहुसंख्यक लोगों की अधिकतम रुचि हो ।” –प्रो. विलार्ड ब्लेयर 

“पर्याप्त संख्या में मनुष्य जिसे जानना चाहे वह समाचार है, शर्त यह है कि वह सुरुचि तथा प्रतिष्ठा के नियमों का उल्लंघन न करे।” – जे.जे. सिकंदर 

परिभाषा के बिना भी समाचार का बोध पाठक को उस स्पंदन से होता है जो वह उसे पढ़कर प्राप्त करता हैं समाचार का बोध उस आंशिक या पूर्ण संतोष से भी होता है जब पाठक उसे पढ़कर अपने को अधिक सूचित, ज्यादा शिक्षित पाता है। स्पंदनकारी वही होगा जो मन-मस्तिष्क को दिलचस्प लगे। मानसिक संतोष उससे मिलेगा जो महत्त्वपूर्ण जानकारी देगा। अतः समाचार को सदैव नया दिलचस्प, मनोरंजक और महत्त्वपूर्ण होना चाहिए।” 

किसी विद्वान ने समाचार को किसी असाधारण घटना की अविलम्ब सूचना माना है।

 समाचार का प्रस्तुतीविवेक : 

समाचार में समाचारत्व को जानने के लिए एक उदबुद्ध, निष्पक्ष

निर्भीक, प्रत्युत्पन्नमति व्यक्तित्व समाचार नहीं जान सकता न उसे आलेखन रूप दे सकता है। समाचारों की दुनियां में संवाददाता और उपसम्पादक ऐसे व्यक्ति हैं जो समाचार की कथा अर्थात् न्यूजस्टोरी को जन्म देते हैं। संवाददाता घटनास्थल पर पहुंचकर वहां की स्थितियों को भांपकर प्रामाणिकता तथा तथ्यात्मकता के साथ समाचार में अपरिहार्य जानकारियों को अपनी नोटबुक या डायरी में लिखता है और अपने कार्यालय में उसे एक समाचार के रूप में निर्मित कर देता है, वह उसे दूरभाष, फैक्स, टेलीप्रिंटर या अन्य माध्यम से अपने पत्र कार्यालय में भेजता है जहां समाचार कक्ष में उप सम्पादक समाचारों का सम्पादन कार्य अर्थात् उन्हें पठनीय बनाने का कार्य करता है। 

इन दोनों व्यक्तियों के परिश्रम का ही परिणाम है कि भोरकाल में 10-12 पृष्ठों का पत्र देश-विदेश के नवीनतम समाचारों से ओत-प्रोत हमें प्राप्त हो जाता है। संवाददाता और उपसम्पादक को समाचार का समाचारत्व अर्थात समाचारों को प्रस्तुत करने से पूर्व एक विवेकशीलता का परिचय देना होता है। उन्हें देखना होता है कि जो समाचार किया जा रहा है क्या वास्तव में वह एक समाचार है? समाचार में नवीनता, आसाधारणता, सामयिकता, विशिष्टता का होना बहुत जरूरी है। उसे पढ़ने में अधिकांश लोग रुचि रखें। समाचार किसी भी सामयिक घटना का तथ्यबद्ध, परिशुद्ध, निष्पक्ष विवरण है। ये समाचार के मूल तत्त्व हैं इनसे ही किसी समाचार का समाचारिक मूल्य पता चलता है। समाचार लिखते समय रिपोर्टर को और समाचार चयन कर लीड रूप देते समय उपसम्पादक को इस समाचारिक मूल्य का ध्यान रखना पड़ता है। समझदारी और विवेक इसी में है कि समाचार सूचना प्रदायक हो, जनहित में हो और मानवीय अभिरुचि का हो। समाचार सामयिक हो, समाचारों में वर्णित घटना का सम्बन्ध हमारे जीवन से हो। संवाद या समाचार कोई आख्यान या काल्पनिक कहानी नहीं है। 

वास्तव में समाचार लिखना एक कला है, सत्यता, स्पष्टता, सुरुचि, सारतत्त्व अर्थात् संक्षिप्तता, कौतूहल वृत्ति की परितुष्टि (कब, क्यों, क्या, कौन, कहां, कैसे) आदि का ध्यान रखकर समाचार प्रस्तुत

किया जा सकता है। समाचार गठन करने का सीधा तरीका यही है कि छह ककारों की परितुष्टि हो अर्थात् इनकी सम्यक जानकारी हो । 

समाचार के अंग : 

जब हम समाचार-पत्र पढ़ते हैं तो हमें समाचार के अंगों का उतना आभास नहीं होता। यदि हम पत्रकारिता में ज्ञान अर्जित कर लें तो हम इन अंगों को तुरंत पहचान लेंगे। समाचार के पांच अंग हैं जो इस प्रकार हैं 

1. शीर्षक (Headline) 

2. समाचार स्रोत (Source of News) अथवा तिथि रेखा (Date Line) 

3. समाचार आमुख या इन्ट्रो (Entro) – 

4. समाचार काया (Body) 

5. टेक (Take) 

समाचार का शीर्षक देना एक कला है। समाचार पढ़ने से पूर्व हमारा ध्यानाकर्षण शीर्षक ही करता है। संवाददाता घटनास्थल की गतियों का बड़ी सूक्ष्मता से अध्ययन कर एक समाचार कथा (News Story) लिखता है, वह समाचार का सारत्व ज्ञापित करने वाला शीर्षक लिखता है। शीर्षक कई प्रकार के होते हैं। शीर्षक के बाद स्रोत या तिथिरेखा आती है। संवाददाता को जिस समाचार समिति से या समाचार एजेन्सी से समाचार मिले उसका उल्लेख किया जाता है। यदि संवाददाता विशेष कोटि का अर्थात् विशेष संवाददाता है तो उसका नामोल्लेख भी कर दिया जाता है। यह कोष्ठक में तिथि, स्थान के साथ लिखा जाता है। कुछ पत्रों में संवाददाता का नाम न देकर निजी संवाददाता लिखने की प्रथा है। स्रोत या तिथि रेखा का एक महत्त्व यह है कि इससे घटना की तिथि को संकलित करने में सहायता मिल जाती है । 

शीर्षक, स्रोत, तिथिरेखा लिखने के उपरांत समाचार की इन्ट्रो दी जाती है। इन्ट्रो या आमुख समाचार का मस्तिष्क कहा जाता है। इसमें सारे समाचार का सार सक्षपण या निष्कर्ष रूप रहता है। शीर्षक की भांति इन्ट्रो लेखन भी एक कला है।’ यह सर्वमान्यता है कि आज के व्यस्तता भरे माहौल में समाचार कोई नहीं पढता । केवल समाचारों की सुर्खियां अर्थात् शीर्षक और इन्ट्रो ही पढ़ी जाती है। इंट्रो में सारी – जिज्ञासावृत्ति परितुष्ट करने की क्षमता होती है। इन्ट्रो के बाद बॉडी (Body) का प्रयोग किया जाता है इसे समाचार कथा का फैलाव भी मान सकते हैं। इस विस्तार में ‘घटना कैसे घटी’ पर अधिक बल दिया जाता है। अक्सर वर्द्धमान (Spread News) में इसका प्रयोग होता है। समाचार विषयानुरूप कई प्रकार के होते हैं, परन्तु स्वरूप के अनुसार समाचार को दो रूपों में बांटा जाता है 

1. ऐतिहासिक समाचार या विशिष्ट समाचार (Hot News) 

2. वर्द्धमान समाचार या व्यापी समाचार (Spread News) 

ऐतिहासिक समाचार तो राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी अकस्मात् घटना के सूचक होते हैं उनमें भी बॉडी होती है, परन्तु उनकी जानदार इन्ट्रो की बॉडी होती है। जिन घटनाक्रमों की कई-कई दिनों तक, महीनों तक विकास पाने की गुंजाइश रहती है उनमें बॉडी अवश्य प्रयोग की जाती है। आजकल पत्रकारों में यह माना जाता है कि बॉडी का स्थान इन्ट्रो ने ले लिया है। अतः अधिकांश समाचारों में बॉडी होती ही नहीं। जहां तक टेक (Take) का संदर्भ है। टेक का अभिप्राय निष्कर्ष या संवाददाता की टिप्पणी है जिसमें कई प्रकार की भविष्यवाणियां भी हो सकती हैं। आजकल टेक भी समचारों में नहीं दी जाती । 

समाचार लेखन में विलोमस्तूपी (Inverted Pyramid) प्रयोग : 

स्तूप को यदि उल्टा दिया जाये तो उसकी आकृति किसी त्रिकोण को उल्टा कर देने जैसी होगी। इसका अभिप्राय है कि शीर्षक, स्रोत के बाद इन्ट्रो देकर समाचार की बॉडी, टेक आदि में अनावश्यक विस्तार न दिया जाये। अधिक महत्त्वपूर्ण वस्तु को अधिक स्थान, कम महत्त्वपूर्ण वस्तु को कम स्थान और जिसका कोई महत्त्व ही न हो, उसे कोई स्थान न दिया जाये।

समाचार सम्पादन व समाचार पुनर्लेखन 

सम्पादन का अर्थ है— काट-छांट, संवारने की प्रक्रिया । इसमें रचना को संशोधित किया जाता है व सुधारा जाता है। विन्यास में सुन्दरता विराजती है। इस सूत्र को अपनाकर ही समाचार सम्पादन संभव है। 

पत्र कार्यालय में जो उपसम्पादक समाचारों का सम्पादन करता है उसे कापी सम्पादक या कापी रीडर कहा जाता है। वह अत्यंत सजग होता है, भाषा पर पूर्ण अधिकार रखता है, सामान्य ज्ञान से है। सबसे बड़ी बात है वह समाचार का समाचार मूल्य जानने में निपुण युक्त होता होता है। एक कुशल उपसम्पादक को अनुवाद करना आता है, आकर्षक शीर्षक देने की कला आती है। वह पृष्ठ का कलेवर सजाने में सक्षम होता है। 

उपसम्पादक समाचार मिलने के उपरांत उसका मूल्यांकन करता है, उसे प्राथमिकता के आधार पर प्रथम लीड, सैकेण्ड लीड का रूप देता है। पत्र में उनका स्थान निश्चित करता है। स्टाइल शीट (Style sheet) के अनुरूप कसावट उत्पन्न करता है। स्टाइल शीट एक प्रकार की निर्देशिका है। पत्र कार्यालय में समाचार समितियों, निजी संवाददाताओं, विशेष संवाददाताओं, विभिन्न स्थानों के संवाददाताओं तथा मुफस्सिल संवाददाताओं से समाचार मिलते हैं। 

समाचार सवांददाताओं द्वारा भेजी गई न्यूज स्टोरी में अनेक तरह की त्रुटियां होती हैं जिन्हें पुनर्लेखन में सुधारा जाता है। अप्रशिक्षित संवाददाता भाषा सम्बन्धी अशुद्धियां कर देते हैं। समाचार-पत्र भाषा का परिशुद्ध रूप स्थापित करने का प्रयास करते हैं। अतः संवाददाता को भाषागत अशुद्धि दूर करनी पड़ती है। तथ्यों को सही रूप में प्रतिपादित करना पड़ता है तथ्यों में अपूर्णताओं को दूर करना पड़ता है। उपसम्पादक इन्ट्रो में सारे तथ्यों को लाने की चेष्टा करता है। इन्ट्रो समाचार के प्रारम्भ 3 या 4 पंक्तियां होती हैं। जिनमें समाचार का मूल्य निहित रहता है। पुनर्लेखन करने वाले उपसम्पादक समाचारों के स्रोत से सम्पर्क साध कर समाचार से जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्य प्राप्त कर समाचार को अधिक स्पंदनशील बनाता है। जैसे वह किसी समाचार के संदर्भ में सम्बन्धित अधिकारी, पुलिस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, अस्पताल आदि की सहायता ले सकता है। 

उपसम्पादक अत्यंत विवेकशीलता का परिचय देता हुआ समाचारत्व की परीक्षा करता हैं यदि किसी समाचार में किसी व्यक्ति या संस्था का प्रचार मात्र हो, वह उसे समाचार के रूप में प्रतिपादित नहीं करता । अतिशय प्रशंसा, स्तुति या निन्दा करना पत्र का कार्य नहीं है। उपसम्पादक इस बारे में भी निरंतर जागरूक रहता है कि किसी संवाददाता द्वारा प्रेषित समाचार से किसी की मानहानि न हो। कोई समाचार साम्प्रदायिकता व हिंसा को बढ़ावा देने वाला न हो। उपसम्पादक समाचार के पुनर्लेखन में इस बात का पूरा ध्यान रखता है कि अदालती अवमानना न होने पाये। 

समाचार लेखन का अभिप्राय रोचक, चटपटी रचना करना नहीं है। समाचार लेखन एक अहम् दायित्वपूर्ण कार्य है। संवाददाता और उपसम्पादको को समाचार कथा लिखते समय समाचार मूल्य को समझना पड़ता है और अनावश्यक विस्तार को काटना पड़ता है।

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